हेपेटाइटिस बी का इलाज

हेपेटाइटिस बी का इलाज 

हेपेटाइटिस बी का इलाज,hepatitis b ka ilaj hindi me


विभिन्न कारणों से लीवर या यकृत में सूजन की स्थिति को हैपेटाइटिस नामक रोग कहा जाता है इस रोग के चलते लीवर की कार्य प्रणाली गड़बड़ा जाती है हैपेटाइटिस के कुछ सामान्य कारण इस प्रकार हैं...




  वायरस का संक्रमण: इसे वायरस हेपेटाइटिस भी कहते हैं देश में हैपेटाइटिस होने का प्रमुख कारण वायरस के संक्रमण इंफेक्शन है चार ऐसे प्रमुख वायरस हैं जो लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं
हैपेटाइटिस  ए. बी.सी.और ई:  ये  वायरस दूषित खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में पहुंचते हैं इस प्रकार के हैपेटाइटिस के मामले गर्मी और बरसात के मौसम में ज्यादा सामने आते हैं क्योंकि इन मौसम में पानी काफी प्रदूषित हो जाता है
 अल्कोहल लेना: शराब के अत्यधिक सेवन से यह रोग संभव है जिसे अल्कोहलिक हेपेटाइटिस भी करते हैं
 नुकसानदायक दवाएं: कुछ दवाएं लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं इस कारण भी है कि संभव है 

हेपेटाइटिस ए. और बी. से बचाव


  •  कुछ भी खाने से पहले हाथों को जीवाणुनाशक साबुन या फिर हैंड सैनिटाइजर से साफ करना चाहिए
  •  व्यक्तिगत अथवा सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता रखनी चाहिए अथवा अपने सड़कों पर लगे असुरक्षित स्थानों के खाद्य पदार्थों से परहेज करें और इसकी वायरस से बचाया जा सकता है
  •  हेपटाइटिस ए से बचाब के लिये टीका वैक्सीन भी उपलब्ध है इस वैक्सीन को लगाने के बाद आप ताउम्र हेपटाइटिस ए से सुरछित रह सकते है हेपेटाइटिस ई की वैक्सीन के लिए विकास कार्य जारी है

 हेपेटाइटिस बी. और सी. से बचाव 



इन दोनों प्रकार की हैपेटाइटिस को पैदा करने वाले वायरस दूषित इंजेक्शनों के लगने से सर्जरी से संबंधित अस्वच्छ उपकरणों नीडल्स और नजरों के इस्तेमाल के जरिए हैपेटाइटिस से ग्रस्त व्यक्ति से स्वस्थ व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं जांच किए बगैर रक्त के चढ़ाने से भी कोई व्यक्ति हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी से संक्रमित हो सकता है नवजात शिशु की मां से भी हेपेटाइटिस बी का वायरस को संक्रमित कर सकता है बशर्ते कि बच्चे की मां हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त हो बच्चे को टीका लगाकर इस रोग की रोकथाम की जा सकती है


 एड्स के वायरस की तरह हैपेटाइटिस बी और सी असुरक्षित शारीरिक संबंध स्थापित करने से भी हो सकता है फिलहाल ए आईपीसी की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है इसलिए टाइट इसकी रोकथाम डिस्पोजेबल नीडल और सिरिंज का इस्तेमाल कर की जाती है रक्त और इससे संबंधित तत्वों की स्वच्छता रक्तदान करने वाले लोगों से ही लिए हैं


हेपेटाइटिस बी का इलाज



क्या है इलाज़


 हैपेटाइटिस से ग्रस्त अनेक मरीजों का इलाज घर पर किया जा सकता है घर में रोगी को उच्च प्रोटीन युक्त आहार दिया जाता है विश्राम करता है और उसे विटामिन सी युक्त आहार या सप्लीमेंट दिया जाता है वही जिन मरीजों को उल्टियां होती हैं और उनके शरीर में समान रुप से रक्त का थक्का अब नॉर्मल काटने की समस्या हो ऐसे मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होती है पिटाई की सेवा और अल्कोहलिक हेपेटाइटिस के लिए कोई विशिष्टताएं फ़िलहाल उपलब्ध नहीं है सिर्फ मरीज के लक्षणों के अनुसार इलाज किया जाता है





 बी.और सी. बेशक अब ऐसी कई कारगर  दवाएं उपलब्ध हैं जो हैपेटाइटिस बी और सी वायरस के इलाज में अच्छे नतीजे दे रही हैं एक वक्त था जब इस प्रकार के हैपेटाइटिस का कारगर इलाज उपलब्ध नहीं था इस भी के लिए मुंह से ली जाने वाली एंटीवायरल दवाएं उपलब्ध हैं इन दवाओं को डॉक्टर की निगरानी में पीड़ित व्यक्ति को लेना चाहिए वायरल को नष्ट करने के लिए लीवर के नुकसान को रोकने की दवाई दवाई भारत में उपलब्ध है जो मरीज पुरानी क्रोनिक हेपेटाइटिस बी से ग्रस्त हैं


 उन्हें भी इलाज कराने की जरूरत पड़ती है वहीं जो मरी थी एक क्यूट हैपेटाइटिस से पीड़ित हैं अपने शरीर के तंत्र के सशक्त होने पर HIV के वायरस को परास्त कर देते हैं जरूरत पड़ने पर अनेक मरीज को एंटीवायरल दवाई कई सालों तक लेनी पड़ सकती है किसी के लिए कई नई कार दवाएं उपलब्ध दवाएं किसी के वायरस को खत्म कर देते हैं


कुछ दवाओं का नुकसान


टीबी दिमाग दौरा ब्रेन फिट्स के इलाज़ में इस्तेमाल कि जाने बाली दवायें और कुछ दर्द निवारक दवाएं पेनकिल्लर लिबर को नुकसान पहुचाते है अगर इन दवाओं में रोगी के संधर्ब में डॉक्टर्स द्वारा समुचित मॉनिटरिंग ना कि गई हो

अल्कोहलिक हेपेटाइटिस



शराब का बड़ता सेवन या अत्यधिक मात्रा में अल्कोहलिक हेपेटाइटिस के मामले बढ़ते जा रहे है ऐसे हेपेटाइटिस के लिये शराब बिल्कुल बन्द कर देनी चाहिए अल्कोहल लिबर को धीरे धीरे नुकसान पहुंचाता है और इस बात का पता व्यक्ति को तब चलता है जब जिंदगी को खतरे में डालने बाली बीमारी उसे जकड़ लेती है



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